रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार के फैसले को पलटते हुए JPSC (11वीं से 13वीं) और JSSC-CGL समेत कई परीक्षाओं व नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने इस प्रशासनिक कार्रवाई को ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों’ (Principle of Natural Justice) का खुला उल्लंघन माना है। इस ऐतिहासिक फैसले से उन हजारों चयनित और कार्यरत अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी नौकरियां और भविष्य पिछले दिनों सरकार की अचानक आई अधिसूचना से दांव पर लग गए थे। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में 15 दिनों के भीतर जवाबी हलफनामा (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का सख्त निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 15 सितंबर, 2026 तय की है।
झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार को एक करारा कानूनी झटका दिया है। न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और उनके जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के ऐतिहासिक फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए स्पष्ट किया कि सरकार बिना किसी ठोस व्यक्तिगत जांच या उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए उन अधिकारियों और कर्मचारियों को सेवामुक्त नहीं कर सकती, जो पूरी तरह पारदर्शी तरीके से अपनी योग्यता के बल पर चयनित होकर महीनों से सेवा दे रहे हैं। अदालत के इस आदेश के बाद प्रभावित याचिकाकर्ताओं और सफल अभ्यर्थियों को तत्काल प्रभाव से काम पर लौटने का रास्ता साफ हो गया है।
